Mansik durbalta ke lakshan kya hai

Mansik durbalta ke lakshan kya hai

ये दो बातें आपकी mansik durbalta ke lakshan दर्शाती हैं : चाणक्य नीति

    mansik durbalta ke lakshan क्या होते हैं ? आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति के अंदर कई सारी जीवन उपयोगी बाते बताई गई है। उनमें से कई सारी बातें हमारे दैनिक जीवन में भी लागू होते हैं। आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में mansik durbalta ke lakshan के बारे में भी बताया है। आचार्य चाणक्य प्राचीन भारत के एक बहोत ही महान विद्वानों में से एक है।

mansik durbalta ke lakshan, दो मुख्य लक्षण : चाणक्य नीति

1.बोलने के अवसर पर चुप रहना

2.चुप रहने के अवसर पर बोलना

आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति नामक जो नीति शास्त्र बनाया है। वो आज के आधुनिक युग में भी काफी उपयोगी साबित हुआ है। आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति के अंदर काफी सारी व्यावहारिक जीवन की बातों और अच्छी और बुरी आदतों को भी बहोत ही सरल तरीके से समझाया है। आचार्य चाणक्य ने व्यक्ति के गुणों के बारे में भी काफी कुछ बताया है और समझाया है। की व्यक्ति को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए वगैरह वगैरह।

     आज हम बात करने जा रहे हैं व्यक्ति के उन्हीं गुणों और दुर्गुणों के बारे मे। यां फिर ये कह लीजिए कि उनकी अच्छी और बुरी आदतों के बारे में।
आचार्य चाणक्य बताते हैं उन दो आदतों के बारे में जो आपकी mansik durbalta ke lakshan को दर्शाता है।

Bolne ke avsar par chup rahna
Bolne ke avsar par chup rahna

बोलने के अवसर पर चुप रहना , mansik durbalta ke lakshan में पहला है :


     कई सारे लोग बोलने के अवसर पर चुप रहते हैं। सभी लोग मानसिक रूप से मजबूत नहीं होते। हम कई बार देखते हैं कि, कुछ लोग भीड़ के सामने आने तथा बोलने से गभराते हैं। जब कई सारे लोग भीड़ देखते हैं तब ना जाने क्यों उनकी बोलती ही बंद हो जाती है। जैसे कि उनके मुंह में जबान ही ना हो।


उनके अंदर भीड़ देखने एक अनजाना डर ही उत्पन्न हो जाता है। उन्हें लगता हैं कि में ठीक से बोल नहीं पाया तो क्या होगा। ये सभी लोग मेरे बारे मैं क्या सोचेंगे, लोग मेरे पर हसेंगे तो नहीं। ये होगा वो होगा जैसी बातें सोचकर ही उलझ जाते हैं।


तो कई सारे लोग अपने आप यां दूसरे लोगों पर अन्याय होता देख कर चुप रहते हैं। वो लोग डरते हैं कि यदि मैंने कुछ कहा तो सामने वाला आदमी क्या कर देगा। ये होगा वो होगा वगैरह वगैरह। ये लोग अपने हक के लिए लड़ने से भी डरते हैं। आचार्य चाणक्य बताते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए अन्याय का प्रतिकार करना चाहिए।

Chup rahne ke avsar par bolna
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चुप रहने के अवसर पर बोलना mansik durbalta ke lakshan में दूसरा लक्षण है :

    दुनिया में कई सारे लोगों को चुप रहने के अवसर पर बोलने की एक खराब आदत होती हैं। सभी अवसर पर बोलना अच्छा नहीं होता। कई सारे लोगों की तो जबान ही मुंह में नहीं टिकती वो बस बक बक किए ही जाते हैं।

हम कई बार देखते हैं कि जब कोई घटना घट जाती है यां फिर कोई काम खत्म हो जाने के बाद कई सारे लोगों को बड़ी डिंगे मारने की आदत होती है कि यदी में उस समय वहां होता तो ये कर डालता वो कर डालता वगैरह वगैरह। 

तो कई सारे लोग किसी पर अन्याय हो जाने के बाद बड़ी बड़ी डिंगे मारते हैं कि में आपके साथ होता तो ये कर डालता वो कर डालता वगैरह वगैरह। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ये एक मानसिक दुर्बलता के लक्षण ही है। कोई भी कार्य करना है तो समय पर करो क्योंकि समय के बित जाने के बाद उसका महत्व कम हो जाता है।

Mansik durbalta dur karne ke upay
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मानसिक दुर्बलता दूर करने के उपाय :

दुनियां में कई सारे लोगों में mansik durbalta ke lakshan होते हैं। किसी को कुछ डर होता है, तो किसी को कुछ अलग डर होता है। कुछ लोग पानी से डरते हैं, तो कुछ लोग भीड़ से डरते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं , जो अन्याय के वक्त प्रतिकार करने से भी डरते हैं।

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि, इस दुनियां में कोई भी चीज ऐसी नहीं है , जिससे आपको डरने कि जरूरत हो। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है कि, इस दुनियां में कोई भी चीज, वस्तु, यां फिर कोई भी विचार यां अन्य कुछ भी आपको शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक यां फिर आध्यात्मिक तौर पर दुर्बल बनाए, कमजोर करे उन सभी चीजों को जहर समझ कर छोड़ दीजिए।

श्री स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है कि इस ब्रह्मांड में ईश्वर के बाद यदि कोई सबसे शक्तिशाली है तो वो है, आत्मा यानी की हम। स्वामी विवेकानंद जी का कहना है कि, इस ब्रह्मांड में ऐसा कोई भी काम नहीं है जो आत्मा ना कर सके, और हम सभी सर्वशक्तिमान आत्मा ही है।

मानसिक डर का इलाज यां उपाय :

दुनियां में कई तरह के लोग होते हैं, और सभी लोगों को अलग अलग प्रकार का मानसिक डर भी रहता है। कोई ऊंचाई से डरता है, कोई अंधेरे से डरता है तो कोई कुछ अन्य चीजों से डरता है। आखिरकार ये मानसिक डर होता क्या है ? मानसिक डर यां दुर्बलता एक तरह का विचारों को समूह होता है। यानी कि ये आपके मस्तिष्क यां दिमाग कि एक तरह कि प्रक्रिया है, रिएक्शन है जो किसी खास चीज यां कोई खास मौके पर होती है।

हमारा मन उन यादों को यां फिर उन विचारों को ज्यादा याद दिलाता है यां फिर रिपीट करता है जिसके बारे में हम ज्यादा सोचते हैं। हमारे दिमाग को लगता है कि जिन चीजों के बारे में हम ज्यादा सोचते हैं वो हमारे ज्यादा काम कि है। इसलिए वो उसे बार बार रिपीट करता रहता है। चाहे वो विचार यां यादे अच्छी हो यां बुरी हो लेकिन, जीस भी चीज यां घटना वो चाहें अच्छी हो यां बुरी उनके बारे में जितना हम ज्यादा सोचते हैं।

हमारा दिमाग उसे उतना ही ज्यादा रिपीट करता रहता है। अब होता क्या है ना की कोई भी व्यक्ति को जिस चीज यां घटना से डर लगता है, वो व्यक्ती उस चीज यां घटना के बारे में ज्यादा सोचता रहता है। और यही उसकी सबसे बड़ी ग़लती होती है। क्योंकी हमारे दिमाग को ये पता नहीं होता कि क्या चीज अच्छी है यां बुरी ,वो तो हम अपनी बुद्धि से ही डिसाइड करते हैं कि क्या अच्छा है और क्या बुरा है।
अब व्यक्ती जिस भी चीजों के बारे में यां घटना के बारे में जितना ज्यादा सोचेगा , उसका दिमाग उसे (उस चीज यां घटना के विचार को ) उतनी ही ज्यादा बार रिपीट करता रहेगा। और फिर जितना ज्यादा नेगेटिव विचार आयेंगे उस व्यक्ति का मानसिक तनाव उतना ही बढ़ता रहेगा। इन सभी चीजों से ( मानसिक डर ) से निकलने को एक उपाय है कि, किसी भी नेगेटिव विचार यां घटना के बारे में जीतना हो सके उतना कम ही सोचें।
और व्यक्ती जितना किसी भी विचार यां घटना के बारे में कम सोचेगा , उसका दिमाग उसे ज्यादा रिपीट नहीं करेगा। और फिर वो धीरे धीरे उससे बाहर आ जायेगा। और ऐसे ही वो mansik durbalta ke lakshan धीरे धीरे दूर हो जाएंगे। इसलिए हमेशा पॉजिटिव थिंकिंग ही करे और जीवन में खुश रहे।
धन्यवाद्
 
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